कार्यवाहक प्रमोशन बना पुलिसकर्मियों के लिए मुसीबत, 5 हजार से अधिक कर्मचारियों पर नियमित पदोन्नति का संकट
भोपाल।
मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में वर्षों से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया अब एक नई परेशानी खड़ी करती नजर आ रही है। वर्ष 2016 से न्यायालयीन मामलों के कारण पुलिस सहित कई विभागों में नियमित पदोन्नतियाँ बंद थीं। इसका असर यह हुआ कि बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी बिना प्रमोशन पाए ही सेवानिवृत्त हो गए।
प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए वर्ष 2021 में शासन ने कार्यवाहक प्रभार देने की व्यवस्था शुरू की थी। इसके तहत आरक्षकों को कार्यवाहक प्रधान आरक्षक, प्रधान आरक्षक को कार्यवाहक एएसआई, एएसआई को कार्यवाहक एसआई और एसआई को कार्यवाहक निरीक्षक की जिम्मेदारी दी गई। कई पुलिसकर्मियों ने वर्षों तक उच्च पदों का दायित्व संभाला।
अब नियमित पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू होने के बाद पुलिस विभाग में नई चुनौती सामने आई है। पुलिस मुख्यालय द्वारा बनाए जा रहे नियमों के अनुसार जिन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच, लंबित कार्रवाई या अन्य कारण होंगे, उन्हें प्रमोशन के लिए अनफिट माना जा सकता है।
ऐसे में कार्यवाहक प्रभार के दौरान हुई जांच और कार्रवाई कई पुलिसकर्मियों के लिए पदोन्नति में बाधा बन सकती है। आशंका जताई जा रही है कि पुलिस विभाग में करीब 5 हजार या उससे अधिक अधिकारी-कर्मचारी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
जूनियर बन सकते हैं सीनियर
यदि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी नियमित प्रमोशन से वंचित होते हैं तो स्थिति यह बन सकती है कि उनके जूनियर अधिकारी उनसे ऊपर के पद पर पहुंच जाएं। इससे वरिष्ठ पुलिसकर्मियों को अपने ही जूनियर अधिकारियों के अधीन काम करना पड़ सकता है।
पुलिसकर्मियों का कहना है कि कार्यवाहक प्रभार उन्होंने अपनी इच्छा से नहीं लिया था, बल्कि शासन की व्यवस्था और विभागीय जरूरतों के कारण उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई थी। ऐसे में कार्यवाहक अवधि के दौरान हुई परिस्थितियों का नुकसान केवल उन्हीं को उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब नियमित पदोन्नति प्रक्रिया वर्षों तक रुकी रही और शासन ने कार्यवाहक व्यवस्था लागू की, तो अब उसी व्यवस्था के कारण उन्हें पदोन्नति से वंचित करना उचित नहीं है तथा उनके मौलिक अधिकार का हनन भी है। यदि उन्हें कार्यवाहक निरीक्षक से उप निरीक्षक बना दिया जाता है तो कितनी मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ेगा ।
अब सभी की नजर पुलिस मुख्यालय और राज्य शासन के फैसले पर है। पुलिसकर्मियों को उम्मीद है कि नियमों और न्याय के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसा समाधान निकाला जाएगा, जिससे विभागीय अनुशासन भी बना रहे और वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के साथ अन्याय भी न हो।


