प्रभारी प्राचार्य की विवादित टिप्पणियों पर मचा बवाल, सिलवानी विधायक देवेंद्र पटेल मानसून सत्र में फिर घेरेंगे सरकार, दो प्रोफेसर पहुंचे हाईकोर्ट।
रीवा।
शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रीवा में 22 प्राध्यापकों (Professors) का गोपनीय प्रतिवेदन (CR – Confidential Report) खराब किए जाने का मामला अब बेहद गरमा गया है।
रीवा के शैक्षणिक इतिहास में यह पहली बार है जब किसी प्रभारी प्राचार्य ने एक साथ इतनी बड़ी संख्या में स्टाफ के खिलाफ ऐसा कदम उठाया हो। इस मामले ने न सिर्फ राजनीतिक रूप ले लिया है, बल्कि अब यह कानूनी पचड़े में भी फंस चुका है।
विधानसभा को नहीं दी जानकारी, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव से घिरी सरकार

इस पूरे मामले को सिलवानी विधायक देवेंद्र पटेल ने विधानसभा के बजट सत्र में ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए उठाया था। विधानसभा सचिवालय द्वारा इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग से विस्तृत और पूर्ण विवरण मांगा गया था, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग ने अब तक विधानसभा को कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है।
विभाग के इस ढुलमुल रवैए को देखते हुए विधायक देवेंद्र पटेल आगामी 20 जुलाई से शुरू हो रहे वर्षाकालीन (मानसून) सत्र में एक बार फिर इस मुद्दे को ध्यानाकर्षण के माध्यम से उठाने जा रहे हैं।
नियमों को ताक पर रखकर की गईं संगीन टिप्पणियां
विधायक देवेंद्र पटेल ने उच्च शिक्षा मंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि महाविद्यालय की तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य डॉ. विभा श्रीवास्तव ने 22 प्राध्यापकों के गोपनीय प्रतिवेदन में न सिर्फ ‘साधारण श्रेणी’ अंकित की, बल्कि ‘निकृष्ट’, ‘अक्षम’ और ‘अनुशासनहीन’ जैसी संगीन व प्रतिकूल टिप्पणियां भी दर्ज की हैं।
इन टिप्पणियों के कारण इन सभी वरिष्ठ प्राध्यापकों का भविष्य, उनकी पदोन्नति (Promotion) और सेवानिवृत्ति के लाभ गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
क्या कहता है सामान्य प्रशासन विभाग का नियम?
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि कोई भी कनिष्ठ (Junior) या समकक्ष अधिकारी, वरिष्ठ प्रभार के दौरान अपने मूल पद के समकक्ष अधिकारियों के गोपनीय प्रतिवेदन (CR) में कोई भी प्रतिकूल टिप्पणी नहीं कर सकता।
डॉ. विभा श्रीवास्तव वरिष्ठता क्रम में कनिष्ठ हैं और मूल पद के लिहाज से समकक्ष हैं। ऐसे में उनके द्वारा लिखी गई ये टिप्पणियां पूरी तरह बेबुनियाद, निराधार और नियमों के विरुद्ध हैं।
छात्राओं में आक्रोश, दो प्राध्यापक पहुंचे हाईकोर्ट
इस घटना के बाद से ही कन्या महाविद्यालय के प्राध्यापकों और छात्राओं में गहरा आक्रोश है। छात्राओं ने इस तानाशाही रवैए के खिलाफ पूर्व में उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा था।
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जांच न कराने से क्षुब्ध होकर मामले के दो पीड़ित प्राध्यापक न्याय के लिए माननीय उच्च न्यायालय (High Court) की शरण में चले गए हैं। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया है।
उच्च शिक्षा मंत्री को भी सौंपा पत्र
पीड़ित प्राध्यापकों ने बताया कि हाल ही में रीवा प्रवास के दौरान उन्होंने प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से मुलाकात की और उन्हें एक पत्र सौंपकर पूरे मामले से अवगत कराया है।
प्राध्यापकों की मांग है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और उनके गोपनीय प्रतिवेदन (CR) में दर्ज की गई गलत टिप्पणियों को तत्काल सुधारा जाए।


