बीजेपी को मिलेगा नया राष्ट्रीय अध्यक्ष, मोदी की पसंद या संघ की नजाकत

भारतीय जनता पार्टी में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक बदलाव होने की संभावना है। मौजूदा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा का कार्यकाल अब समाप्ति की ओर है और पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है। ऐसे समय में सवाल यही है क्या अगला अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद से तय होगा, या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नजाकत।
नया अध्यक्ष समरसता और 2029 की तैयारी
सूत्रों की मानें तो अगला अध्यक्ष सिर्फ एक नाम भर नहीं होगा, बल्कि ऐसा चेहरा होगा जो संगठन में समरसता बनाए रखते हुए 2029 के आम चुनावों की रणनीति को सधे हुए कदमों से आगे बढ़ा सके। यही वजह है कि इस नियुक्ति को लेकर जल्दबाजी नहीं की जा रही है। निर्णय से पहले गहन विचार-विमर्श जारी है, जिसमें मोदी-शाह की जोड़ी और संघ का समन्वय अहम भूमिका में है।
सबसे प्रबल दावेदार खट्टर और शिवराज

इस दौड़ में दो नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान। मनोहर लाल खट्टर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री, संघ के पुराने प्रचारक और प्रधानमंत्री मोदी के करीबी माने जाते हैं। वे सादगी, अनुशासन और प्रशासनिक कठोरता के लिए जाने जाते हैं। संगठन के साथ उनकी मजबूत पकड़ और संघ से पुराने संबंध उन्हें सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल करते हैं। शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश के लोकप्रिय नेता, लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे और जमीनी कार्यकर्ताओं में उनकी गहरी पैठ है। वे पार्टी के भीतर भावनात्मक नेतृत्व का प्रतीक माने जाते हैं। हालांकि संघ के साथ खट्टर की सहजता उन्हें थोड़ी बढ़त देती है।
सिर्फ चेहरा नहीं, रणनीतिक कप्तान चाहिए
भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष केवल संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन नहीं करेगा बल्कि उसे आने वाले विधानसभा चुनावों राज्यों में नेतृत्व समन्वय और 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति को दिशा देनी होगी। यही कारण है कि यह फैसला सिर्फ राजनीतिक नहीं, वैचारिक और रणनीतिक स्तर पर भी बेहद महत्वपूर्ण है।
अध्यक्षों की परंपरा और मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व
अब तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्षों की सूची पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश से कई नेता इस पद तक पहुंचे हैं। मध्यप्रदेश से अब तक सिर्फ कुशाभाऊ ठाकरे ही पूर्णकालिक अध्यक्ष रहे हैं, जिन्हें संगठनात्मक दृष्टि से पार्टी का ‘आर्किटेक्ट’ कहा जाता है। यदि शिवराज सिंह को यह जिम्मेदारी मिलती है, तो वे प्रदेश से दूसरे पूर्णकालिक अध्यक्ष होंगे।
क्रम नाम राज्य कार्यकाल उम्र (नियुक्ति के समय)
1 अटल बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश 1980–1986 55 वर्ष
2 लालकृष्ण आडवाणी गुजरात 1986–1990, 1993–1998 59 वर्ष
3 मुरली मनोहर जोशी उत्तर प्रदेश 1990–1992 56 वर्ष
4 कुशाभाऊ ठाकरे मध्यप्रदेश 1998–2000 76 वर्ष
5 बंगारू लक्ष्मण आंध्रप्रदेश 2000–2001 66 वर्ष
6 जे. पी. नड्डा हिमाचल प्रदेश 2020–2024 59 वर्ष
7 वेंकैया नायडू आंध्रप्रदेश 2002–2004 53 वर्ष
8 राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश 2005–2009, 2013–2014 54 वर्ष
9 नितिन गडकरी महाराष्ट्र 2009–2013 52 वर्ष
10 अमित शाह गुजरात 2014–2020 49 वर्ष
अंतिम निर्णय, एकमत से ही मुमकिन
भाजपा में संगठनात्मक फैसलों में आमतौर पर प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और संघ की सहमति अहम होती है। इस बार भी ऐसा ही होने की संभावना है। संघ की विचारधारा से सामंजस्य रखने वाला, राज्यों में गुटबाजी को नियंत्रित कर सकने वाला, और मोदी-शाह की राजनीतिक दृष्टि को समझने वाला नेता ही इस कुर्सी पर बैठेगा।
खट्टर और शिवराज दोनों इन कसौटियों पर खरे उतरते हैं, लेकिन संघ की पृष्ठभूमि और मोदी से निकटता के कारण खट्टर की दावेदारी थोड़ी मजबूत मानी जा रही है।
नाम कोई भी हो, लक्ष्य एक 2029 में सत्ता वापसी
नया अध्यक्ष चाहे खट्टर हों या शिवराज, उनकी सबसे बड़ी परीक्षा 2029 के आम चुनाव होंगे। भाजपा का पूरा संगठन अब एक नए नेतृत्व के तहत अगले महासमर की तैयारी में जुटेगा, और यह नेतृत्व केवल एक नाम नहीं, बल्कि पूरे संगठन की भावी दिशा तय करेगा।


