घर का भेदी लंका ढाए
नामांकन निरस्त होने से बढ़ा विवाद, क्या कांग्रेस में अब भी सक्रिय हैं ‘स्लीपर सेल’?
भोपाल।
कांग्रेस में “स्लीपर सेल” का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। राहुल गांधी ने वर्षों पहले कहा था कि पार्टी के भीतर ऐसे लोग मौजूद हैं जो बाहर से कांग्रेसी दिखते हैं, लेकिन काम किसी और का करते हैं। तब इस बयान को राजनीतिक टिप्पणी माना गया था, लेकिन घटनाक्रम कुछ ऐसे रहे कि यह सवाल बार-बार लौटकर सामने आता रहा।
साल 2020 में मध्य प्रदेश में जनादेश वाली कांग्रेस सरकार गिर गई। उस समय भी पार्टी के भीतर से ही विश्वासघात के आरोप लगे। अब छह साल बाद फिर परिस्थितियां ऐसी बन रही हैं कि कांग्रेस के कार्यकर्ता और समर्थक पूछ रहे हैं, क्या पार्टी में आज भी वही “स्लीपर सेल” सक्रिय हैं?
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद कई सवाल हवा में तैर रहे हैं। आखिर ऐसी कौन-सी चूक हुई कि पार्टी की वरिष्ठ नेता का पर्चा ही खारिज हो गया? क्या किसी ने जानकारी छिपाई? क्या जिम्मेदार लोगों ने समय रहते सच नहीं बताया? या फिर यह केवल लापरवाही थी? जवाब जो भी हो, लेकिन शक की सुई फिर पार्टी के भीतर ही घूम रही है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब राहुल गांधी खुद पार्टी में छिपे तत्वों की बात कर चुके हैं, तो फिर ऐसे लोगों की पहचान कर उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? हर हार, हर संकट और हर विवाद के बाद सवाल उठते हैं, लेकिन जवाब कहीं गुम हो जाते हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि इंदिरा गांधी या राजीव गांधी के दौर की कांग्रेस होती, तो क्या इतनी बड़ी चूक पर किसी की जवाबदेही तय नहीं होती? क्या संगठन में अनुशासन और जवाबदेही का वही स्तर आज भी बचा है?
जनता भी अब जानना चाहती है कि कांग्रेस की असली लड़ाई विपक्ष से है या अपने ही घर में बैठे उन लोगों से, जो वक्त आने पर पार्टी की नाव में छेद कर देते हैं।


