जाको राखे साईंया, मार सके न कोय।
मौत के गड्ढे से जिंदगी की जंग, गोविंदगढ़ पुलिस ने 2 घंटे में खोदा समानांतर गड्ढा, सही सलामत निकाला कलेजे का टुकड़ा।
थाना प्रभारी अरविंद राठौर की तत्परता को SP ने सराहा, मां-बाप बंधाते रहे ढांढस, टल गया बड़ा हादसा।
चुआ गांव में थम गई थीं सबकी सांसें, पुलिस की सूझबूझ और ग्रामीणों की एकजुटता ने चमत्कारी ढंग से बचाई शिवेंद्र की जान
रीवा।
शनिवार की सुबह चुआ गांव में जब एक साल का मासूम शिवेंद्र खेलते-खेलते 10 फीट गहरे और महज एक फीट चौड़े गड्ढे में जा गिरा, तो कुछ पल के लिए पूरे गांव की सांसें थम गईं। मां-बाप की आंखों के सामने उनका कलेजे का टुकड़ा अंधेरे गड्ढे में था और हर बीतता सेकंड किसी अनहोनी का डर बढ़ा रहा था।
कहते हैं कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। इस घटना में भी यही सच साबित हुआ। गोविंदगढ़ पुलिस और ग्रामीणों ने घबराहट में गलत कदम उठाने के बजाय सूझबूझ दिखाई। बच्चे को निकालने के लिए बगल में समानांतर गड्ढा खोदने का निर्णय लिया गया। माता-पिता लगातार बच्चे से बात करते रहे ताकि उसका हौसला बना रहे। करीब दो घंटे की मेहनत के बाद जब मासूम सुरक्षित बाहर निकला तो वहां मौजूद हर आंख नम थी। इस पूरे घटनाक्रम में थाना प्रभारी अरविंद राठौर की सराहनीय भूमिका रही। SP गुरुकरण सिंह ने पूरे थाने को धन्यवाद दिया।
यह सिर्फ एक बच्चे के बच जाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी छोड़ जाती है कि आखिर घर के आसपास खोदे गए गड्ढों को खुला क्यों छोड़ दिया जाता है? जिस गड्ढे में शिवेंद्र गिरा, वह एक दिन पहले ही पिलर निर्माण के लिए खोदा गया था। यदि परिवार की नजर समय पर नहीं पड़ती या रेस्क्यू में देर हो जाती, तो परिणाम भयावह हो सकते थे।
निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा के नियमों की अनदेखी अक्सर आम बात समझी जाती है, लेकिन ऐसी छोटी लापरवाही किसी परिवार की जिंदगी भर की पीड़ा बन सकती है। घर के आसपास खोदे गए गड्ढों को तुरंत ढंकना, बैरिकेडिंग करना और बच्चों की पहुंच से दूर रखना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जीवन बचाने का सबसे आसान उपाय है।
गनीमत रही कि इस बार किस्मत, पुलिस की तत्परता और ग्रामीणों की एकजुटता ने एक मासूम की जान बचा ली। लेकिन हर बार चमत्कार नहीं होते। इसलिए यह घटना चेतावनी भी है कि सुरक्षा में बरती गई छोटी सी लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
मासूम शिवेंद्र की मुस्कान लौट आई, मां की गोद फिर भर गई और गांव ने राहत की सांस ली। लेकिन यह घटना हम सभी को याद दिलाती है कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में कोई भी लापरवाही छोटी नहीं होती।


