हाईकोर्ट ने अभय मिश्रा की याचिका ख़ारिज करने से किया इनकार
सेमरिया विधायक अभय मिश्रा को हाई कोर्ट से झटका, चुनाव याचिका रद्द करने का आवेदन खारिज

जबलपुर
विंध्य की सियासत में उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने रीवा जिले की सेमरिया सीट से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को तगड़ा कानूनी झटका दे दिया। अपनी विधायकी को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को शुरुआत में ही खारिज करवाने का विधायक मिश्रा का दांव पूरी तरह उल्टा पड़ गया है। जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने साफ कर दिया है कि मामले में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और अब इस सियासी घमासान का फैसला नियमित ट्रायल और गवाही के बाद ही होगा। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब अभय मिश्रा की विधानसभा सदस्यता पर तलवार लटक गई है।

यह पूरा सियासी नाटक 2023 के उस रोमांचक विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जहां भाजपा के दमदार प्रत्याशी कृष्ण पति त्रिपाठी (KP Tripathi) महज 637 वोटों के बेहद मामूली अंतर से मात खा गए थे। हार के बाद त्रिपाठी ने सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और गंभीर आरोप लगाए कि विधायक मिश्रा ने चुनाव आयोग की आंखों में धूल झोंकी है। याचिका में सनसनीखेज दावा किया गया है कि मिश्रा ने अपने चुनावी हलफनामे में 9 पुराने आपराधिक मामलों की भनक तक नहीं लगने दी। इतना ही नहीं, आईसीआईसीआई बैंक का लगभग 50 लाख रुपये का भारी-भरकम बकाया लोन छिपाने, प्राइवेट कंपनियों से लिए जा रहे वेतन को दबाने और पीडब्ल्यूडी के सरकारी ठेकों में शामिल होने जैसे संगीन आरोप भी उन पर लगे हैं।
खुद को इस कानूनी चक्रव्यूह से निकालने के लिए विधायक मिश्रा ने अदालत में पुरजोर कोशिश की। उनकी तरफ से दलील दी गई कि वे सभी आपराधिक मामलों में पाक-साफ बरी हो चुके हैं। बैंक लोन पर उनका कहना था कि 50 लाख का वह कर्ज उनकी एक पुरानी पार्टनरशिप फर्म का है, जिससे वे सालों पहले किनारा कर चुके हैं। विधायक ने अदालत से गुहार लगाई कि इस याचिका में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे फौरन खारिज कर दिया जाए। लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी दलीलों को फिलहाल दरकिनार कर दिया।
दोनों पक्षों के वकीलों की तीखी बहस के बाद हाई कोर्ट ने अपने कड़े फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता ने जो सुबूत और दस्तावेज पेश किए हैं, वे हवा-हवाई नहीं हैं और पूरी सुनवाई का ठोस आधार बनाते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि विधायक खुद को कितना भी बेदाग बताएं, इसका फैसला बिना गवाही और सबूतों की बारीकी से जांच किए नहीं हो सकता। हाई कोर्ट ने अब विधायक अभय मिश्रा को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते की मोहलत दी है। अगर कोर्ट के ट्रायल में ये चुनावी धांधलियां साबित हो गईं, तो सेमरिया में एक बार फिर चुनाव का बिगुल बज सकता है।


